Rich dad poor dad - book in hindi chapter 1 - lono me - Motivational quotes for success in life

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Monday, 2 March 2020

Rich dad poor dad - book in hindi chapter 1 - lono me

Rich dad poor dad - book in hindi chapter 1 - lono me

Rich dad poor dad - book in hindi chapter 1 - lono me
रिच डैड पुअर डैड

अध्याय - 1 भाग 1

 रिच डैड , पुअर डैड रॉबर्ट कियोसाकी के अनुसार

 मेरे दो डैडी थे , एक अमीर और दूसरे गरीब । एक बहुत पढ़े - लिखे थे और समझदार थे । वे पीएच . डी . थे और उन्होंने अपने चार साल के अंडरप्रेजएट कार्य को दो साल से भी कम समय में कर लिया था । इसके बाद वे आगे पढ़ने के लिए स्टेनफोर्ड युनिवर्सिटी , युनिवर्सिटी ऑफ शिकागो तथा नॉर्थवेस्टर्न युनिवर्सिटी गए और यह सब उन्होंने पूरी तरह से स्कॉलरशिप के सहारे ही किया । मेरे दूसरे डैडी आठवीं से आगे नहीं पढ़े थे ।

दोनों ही अपने करियर में सफल थे । दोनों ने जिंदगी भर कड़ी मेहनत की थी । दोनों ने ही काफ़ी पैसा कमाया था । परंतु उनमें से एक पूरी जिंदगी पैसे के लिए परेशान होता रहा । दूसरा हवाई के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक बन गया । एक के मरने पर उसके परिवार , चर्च और जरूरतमंदों को करोड़ों डॉलर की दौलत मिली । दूसरा अपने पीछे कर्ज छोड़कर मरा । मेरे दोनों डैडी इरादे के पक्के , चमत्कारी और प्रभावशाली थे ।


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दोनों ने मुझे सलाह दी , परंतु उनकी सलाह एक - सी नहीं थी । दोनों ही शिक्षा पर बहुत जोर देते थे , परंतु उनके द्वारा सुझाए गए पढ़ाई के विषय अलग - अलग थे । अगर मेरे पास केवल एक ही डैडी होते . तो मैं या तो उनकी सलाह मान लेता या फिर उसे ठुकरा देता । चूंकि सलाह देने वाले दो थे , इसलिए मेरे पास दो विरोधाभासी विचार होते थे । ( एक अमीर आदमी का और दूसरा गरीब आदमी का ) । किसी भी एक विचार को सीधे - सीधे मान लेने या न मानने के बजाय मैं उनकी सलाहों पर काफ़ी सोचा करता था , उनकी तुलना करता था और फिर खुद के लिए फैसला किया करता था । समस्या यह थी कि अमीर डैडी अभी अमीर नहीं थे और ग़रीब डैडी अभी शराब नहीं थे । दोनों ही अपने करियर शुरू कर रहे थे और दोनों ही दोलत तथा परिवार के लिए मेहनत कर रहे थे । परंतु पैसे के बारे में दोनों के विचार और नज़रिए एकदम अलग थे ।


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उदाहरण के तौर पर एक डैडी कहते थे , “ पैसे का मोह ही सभी बुराइयों की जड़ है । " जबकि दूसरे डैडी कहा करते थे , " पैसे की कमी ही सभी बुराइयों की जड़ है । " जब मैं छोटा था , तो मुझे दोनों डैडियों की अलग - अलग सलाहों से दिक्क़त होती थी । एक अच्छा बच्चा होने के नाते मैं दोनों की बातें सुनना चाहता था । परेशानी यह थी कि दोनों एक - सी बातें नहीं कहते थे । उनके विचारों में ज़मीन - आसमान का फ़र्क था , खासकर पैसे के मामले में । मैं काफ़ी लब समय तक यह सोचा करता कि उनमें से किसने क्या कहा , क्यों कहा और उसका परिणाम क्या होगा । मेरा बहुत - सा समय सोच - विचार में ही गजर जाता था । मैं खद से बार - बार इस तरह के सवाल पूछा करता , उन्होंने ऐसा क्यों कहा ?  और फिर दूसरे डैडी की कही हुई बातों के बारे में भी इसी तरह के सवाल पूछता । काश मैं यह बोल सकता , " हाँ , वे बिलकुल सही हैं । मैं उनकी बातों से पूरी तरह सहमत हूँ । " या यह कहकर मैं सीधे उनकी बात ठुकरा सकता , " बुड्ढे को यह नहीं पता कि वह क्या कह रहा है ।  चूंकि दोनों ही मुझे प्यारे थे , इसलिए मुझे खुद के लिए सोचने पर मजबूर होना पड़ा । इस तरह सोचना मेरी आदत बन गई जो आगे चलकर मेरे लिए बहुत फायदेमंद साबित हुई । अगर मैं एक तरह से ही सोच पाता तो यह मेरे लिए
इतना फायदेमंद नहीं होता ।



धन - दौलत का विषय स्कूल में नहीं , बल्कि घर पर पढ़ाया जाता है । शायद इसीलिए अमीर लोग और ज्यादा अमीर होते जाते अमीर लोग और ज़्यादा अमीर होते जाते हैं , जबकि गरीब और ज़्यादा गरीब होते जाते हैं और मध्य वर्ग कर्ज में डूबा रहता । ज्यादातर लोग पैसे के बारे में अपने माता - पिता से सीखते हैं । कोई गरीब पिता अपने बच्चे को पैसे के बारे में क्या सिखा सकता है ? वह सिर्फ इतना हा कह सकता है , स्कूल जाओ और मेहनत से पढ़ो । हो सकता है वह बच्चा अच्छे नंबरों से कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर ले । फिर भी पैसे के मामले में उसकी मानसिकता और उसका सोचने का ढंग एक गरीब आदमी जैसा ही बना । रहेगा । यह सब उसने तब सीखा था जब वह छोटा बच्चा था । धन का विषय स्कूलों में नहीं पढ़ाया जाता । स्कूलों में शैक्षणिक और व्यावसायिक निपुणताओं पर ज़ोर दिया जाता है , न कि धन संबंधी निपुणता पर । इससे यह साफ़ हो जाता है कि जिन स्मार्ट बैंकर्स ,डॉक्टर्स और अकाउंटेंट्स के स्कूल में अच्छे नंबर आते हैं वे जिंदगी भर पैसे के लिए संघर्ष क्यों करते हैं । हमारे देश पर जो भारी क़र्ज़ लदा हुआ है वह काफ़ी हद तक उन उच्च शिक्षित राजनेताओं और सरकारी अधिकारियों के कारण है जो आर्थिक नीतियाँ बनाते हैं और मज़े की बात यह है कि वे धन के बारे में बहुत कम जानते हैं ।


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आर्टिकल राइटिंग . lono me


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