Motivational book in hindi rich dad poor dad part -7 lono me - Motivational quotes for success in life

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Saturday, 29 February 2020

Motivational book in hindi rich dad poor dad part -7 lono me

Motivational book in hindi  rich dad poor dad part -7

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Lono me


प्रस्तावना भाग -7


" अब सवाल यह उठता है कि किस तरह माता - पिता अपने बच्चों सिखा सकते हैं जो स्कूल में नहीं सीख पाते । आप अपने अकाउंटिंग किस सस सिखाते ? क्या इससे वे बोर नहीं हो जाते । आप उने किस तरह निवेश करना सिखाएंगे जब एक पालक के रूप में पर निवेश के खतरे से डरते हैं ? अपने बच्चों को सुरक्षित जीवन के तेयार करने के बजाय मैंने यह बेहतर समझा कि उन्हें रोमांचक जीवन के तैयार किया जाए । " तो आप किस तरह किसी बच्चे को धन और उन सब चीजों के बारे में सिखा सकते हैं जिन पर हमने अभी विचार किया है ? ” मैंने रॉबर्ट से पास " हम किस तरह इसे माता - पिता के लिए आसान बना सकते है , खासकर तब जब उन्हें खुद ही इसकी समझ न हो । उन्होंने कहा , " मैंने इस विषय पर एक पुस्तक लिखी है ।




 " वह पुस्तक कहाँ है ? "  मेरे कंप्यूटर में । यह बरसों से वहीं बिखरी पड़ी है । मैं कभी - कभार उसमें कुछ बातें जोड़ देता हूँ परंतु में आज तक उसे कभी इकट्ठा नहीं कर पाया । मैंने इस पुस्तक को तब लिखना शुरू किया था जब मेरी पहली पुस्तक बेस्टसेलर हो गई थी , परंतु मैं अभी तक अपनी नई पुस्तक को पूरा नहीं कर पाया हूँ । यह अभी भी खंडों में है । " और वह पुस्तक निश्चित रूप से खंडों में ही थी । उन बेतरतीब खंडों को पढ़ने के बाद मैंने यह फैसला किया कि पुस्तक निश्चित रूप से बेहतरीन धी और समाज में इसकी बहुत जरूरत थी , खासकर ऐसे समय में जब दुनिया तेज़ी से बदल रही थी ।




 हम दोनों तत्काल इस निर्णय पर पहुँचे कि मैं रॉबर्ट की पुस्तक में सह - लेखक बन जाऊँ । मैंने उनसे पूछा कि उनके विचार से किसी बच्चे को कितनी वित्तीय शिक्षा की जरूरत होती है । उन्होंने कहा कि यह बच्चे पर निर्भर करता है । अपने बचपन में ही उन्होंने यह जान लिया था कि वे अमीर बनना चाहते थे और उन्हें एक ऐसे पितास्वरूप व्यक्ति मिल गए थे जो अमीर थे और जो उनका मार्गदर्शन करने के इच्छुक भी थे । रॉबर्ट का कहना था कि शिक्षा ही सफलता की
 नींव है ।
जिस तरह स्कूल में सीखी गई बातें बहुत महत्वपूर्ण होती है , उसी तरह धन संबंधी समझ और बोलने की कला भी महत्वपूर्ण होती है । आगे की कहानी रॉबर्ट के दो डैडियों के बारे में है , जिनमें से एक अमीर है और दूसरे गरीब । इनके जरिए रॉबर्ट उन रहस्यों को बताएंगे जो उन्होंने अपने जीवन में सीखे हैं । दोनों हैडियों के बीच का अंतर एक खास बात उजागर करता है । इस पुस्तक को मैंने बढ़ाया है , इसमें कुछ जोड़ा और घटाया है और इसे व्यवस्थित करने का काम किया है । जो अकाउंटेंट इस पुस्तक को पढे , उनसे मेरा यही अनुरोध है कि वे अपने किताबी ज्ञान को एक तरफ रख दे और अपने दिमाग में रॉबर्ट के सिद्धांतों को घुस जाने दें ।



हालांकि उनमें से कई सिद्धांत पहली नजर में गलत लगेंगे , अकांउट्स के सिद्धांतों की बुनियादी बातों को चुनौती देते लगेंगे , परंतु यह याद रखें कि वे एक महत्वपूर्ण दृष्टि देते हैं कि किस तरह सच्चे निवेशक अपने निवेश के फैसलों का विश्लेषण करते हैं ।




जब हम अपने बच्चों को " स्कूल जाने , मेहनत से पढ़ने और अच्छी नौकरी पाने की सलाह देते है तो अक्सर हम ऐसा सांस्कृतिक आदतों के कारण करते है । ऐसा करना हमेशा सही चीज़ मानी गई है । जब में रॉबर्ट से मिली , तो उनके विचारों ने शुरू में तो मुझे चौंका दिया । दो डैडियों के साथ पले - बढ़े रॉबर्ट के सामने दो अलग - अलग लक्ष्य होते थे । उनके पढ़े लिखे डैडी उन्हें कॉरपोरेशन में नौकरी करने की सलाह देते थे । उनके अमीर डैैडी उन्हें कॉरपोरेशन का मालिक बनने की सलाह देते थे । दोनों ही कामों में शिक्षा की जरूरत थी ,


 परंतु पढ़ाई के विषय विलकुल अलग - अलग थे । पढ़े - लिखे डैडी रॉबर्ट को स्मार्ट बनने के लिए प्रोत्साहित करते थे । अमीर डैडी रॉबर्ट को यह जानने के लिए प्रोत्साहित करते थे कि किस तरह स्मार्ट लोगों की सेवाएं ली जाएँ । दो डैडियों के होने से कई समस्याएँ भी पैदा हुईं । रॉबर्ट के असली डेडी हवाई राज्य में शिक्षाप्रमुख थे । जब रॉबर्ट 16 साल के हुए तो उन्हें इस बात की कोई खास चिंता नहीं सता रही थी , " अगर तुम्हें अच्छे नंबर नहीं मिलते तो तुम्हें कोई अच्छी नौकरी नहीं मिलेगी । " वे पहले से ही जानते थे कि उनके करियर का लक्ष्य था कॉरपोरेशन का मालिक बनना , न कि उसमें नौकरी करना ।



 सच तो यह है कि अगर हाई स्कूल में समझदार और मेहनती परामर्शदाता नहीं मिला होता तो रॉबर्ट कभी कॉलेज भी नहीं गए होते । वे इस बात को मानते हैं । वे दौलत कमाने के लिए बेताब थे परंतु वे आखिरकार मान ही गए कि कॉलेज की शिक्षा से भी उन्हें फायदा हो सकता है । दरअसल इस पुस्तक में दिए गए विचार शायद बहुत से माता - पिताओं को क्रांतिकारी और अतिशयोक्तिपूर्ण लगेंगे । कई लोगों को तो अपने बच्चों को स्कूल में रखने में ही काफी मेहनत करनी पड़ रही है । परंतु बदलते हुए समय को देखते हुए हमें नए और जोखिम भरे विचारों की तरफ ध्यान देने की जरूरत है । अपने बच्चों को कर्मचारी बनने की सलाह देने का मतलब यह है कि हम उन्हें जिंदगी भर अपनी खून - पसीने की कमाई से इन्कम टैक्स व और भी न जाने कितने टैक्स चुकाने की सलाह देते हैं और इसके बाद भी पेंशन की कोई गारंटी नहीं होती । और यह सच है कि आज के ज़माने में टैक्स किसी व्यक्ति का सबसे बड़ा खर्च है । हक़ीक़त में , ज्यादातर परिवार तो जनवरी से तक सिर्फ अपने टैक्स चुकाने के लिए ही सरकार की नौकरी करते हैं । आज नए विचारों की बहुत जरूरत है और यह पुस्तक हमें नए विचार देती है ।


 रॉबर्ट का दावा है कि अमीर लोग अपने बच्चों को अलग तरह की शिक्षा देते हैं । वे अपने बच्चों को घर पर सिखाते हैं , डिनर टेवल पर । हो सकता है कि यह विचार वे न हों जिन पर आप अपने बच्चों के साथ बातें करते हों , परंतु उन पर नजर डालने के लिए धन्यवाद । और मैं आपको सलाह देती है कि आप खोज करते रहें । एक माँ और एक सी . पी . ए . होने के नाते में तो यही सोचती हैं कि अच्छे नंबर लाना और एक बढ़िया नौकरी पा लेना एक पुराना विचार है । हमें अपने बच्चों को नए तरह के विचार देने होंगे । हमें उन्हें अलग तरह की शिक्षा देनी होगी । शायद हम अपने बच्चों को यह सिखाएं कि अच्छे कर्मचारी होने के साथ - साथ वे अपना खुद का निवेश कॉरपोरेशन भी खोल सकें । दोनों का यह तालमेल बढ़िया रहेगा ।



एक माँ होने के नाते मुझे उम्मीद है कि यह पुस्तक सभी अभिभावकों के लिए फायदेमंद होगी । रॉबर्ट लोगों को यह बताना चाहते हैं कि कोई भी व्यक्ति अगर ठान ले , तो अमीर बन सकता है । अगर आप एक माली या गेटकीपर है या पूरी तरह बेरोजगार हैं तो भी आपमें खुद को और अपने परिवार के लोगों को धन संबंधी बातें सिखाने की काबिलियत है । यह याद रखें कि धन संबंधी बुद्धि वह दिमागी तरीका है जिससे हम अपनी धन संबंधी समस्याओं को सुलझाते हैं । आज हम ऐसे विश्वव्यापी तकनीकी परिवर्तनों का सामना कर रहे हैं , जिनका सामना हमने आज से पहले कभी नहीं किया । किसी के पास भी जादू की पुड़िया नहीं है , परंतु एक बात तो तय है । ऐसे परिवर्तन हमारे सामने आने वाले हैं जो हमारे यथार्थ से परे हैं । कौन जाने भविष्य हमारे लिए क्या लाता है ?

पर जो भी हो , हमारे पास दो मूलभूत विकल्प मौजूद हैं । या तो हम सुरक्षा की राह पर चलें या फिर हम स्मार्ट बनकर खुद को धन संबंधी क्षेत्रों में शिक्षित करें और अपने बच्चों की धन संबंधी प्रतिभा को भी जागृत करें । - शेरॉन लेक्टर



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